कठगुलाब : मृदुला गर्ग | Kathgulab Upnayas By : Mridula Garg

कठगुलाब : मृदुला गर्ग | Kathgulab Upnayas By : Mridula Garg

कठगुलाब उपन्यास की कथा नारी जीवन तथा उसके संघर्षो को लेकर लिखा गया है | इस उपन्यास का कथानक समाज में व्याप्त नारी के शोषण, अन्याय तथा स्त्रियों के विभिन्न संघर्षो को प्रस्तुत करता है | समाज में पुरुष द्वारा किस प्रकार से नारी का शोषण कर उसे सताया एवं उसका उपयोग करके फेंक दिया जाता है, यह उन्हीं औरतों की कहानी है | इस उपन्यास के केन्द्र में स्त्री और उसकी विविध समस्याओं को रखा गया है |

उपन्यास का नाम (Novel Name)कठगुलाब (Kathgulab)
लेखक (Author)मृदुला गर्ग (Mridula Garg)
भाषा (Language)हिन्दी (Hindi)
प्रकाशन वर्ष (Year of Publication)1996

कठगुलाब उपन्यास की कथा वस्तु

कठगुलाब उपन्यास की कथावस्तु पाँच भागों में विभक्त है- स्मिता, मारियान, नर्मदा, असीमा और विपिन उपन्यास की प्रमुख नारी पात्र निरंतर हो रहे शोषण से उबकर प्रतिशोध एवं विद्रोह की भावना से भरी रहती है | उपन्यास के प्रथम भाग में स्मिता की कथा उसी की जुबानी कही गयी है | अपराधबोध रहित स्मिता कश्यप बीस वर्ष अमेरिका रहकर भारत लौट आयी है | बीस वर्ष पूर्व ‘स्मिता’ माता पिता की मृत्यु के पश्चात् बहन नमिता के पास रहने जाती है जहाँ उस पर उसके लालची, कामुक जीजा द्वारा मानसिक तथा शारीरिक शोषण होता है | यहाँ तक कि अकेला पाकर वह ‘स्मिता’ पर बलात्कार करता है, परन्तु वह यह नहीं जान पाती कि उसका बलात्कारी कौन था | अपने बलात्कार का बदला लेने के लिए छटपटाती रहती है | बलात्कारित होने के बावजूद उसमें अपराधबोध नहीं है, अपितु इस अन्याय के प्रति उसके मन में रोष है तथा वह प्रतिहिंसा और इंतकाम की आग में जलती है |

‘स्मिता’ स्वयं को प्रतिरोध हेतु ताकत जुटानें के कार्य में लगा देती है | वह इस प्रतिशोध को अंजाम देने के लिए स्वयं को हर दृष्टि से सुदृढ़ करने के प्रयास करती है | इसी सन्दर्भ में ‘स्मिता’ बहन का घर छोड़ अपने बूते पढ़ाई करने पहले कानपुर, फिर नौकरी मिलने पर अमरीका चली जाती है | इस दौरान उसके मन से प्रतिशोध की भावना कतई कम नहीं होती | अमरीका में वह ‘जिम जारविस’ नामक एक मनोचिकित्सक से विवाह करती है जो दरअसल स्वयं एक मनोरोगी था | इस दौरान ‘जिम निरन्तर शारीरिक तथा मानसिक रूप से अत्याचार करता है | ‘स्मिता’ उससे तलाक लेकर एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में भारत आती है तथा रॉ के आफिस में उसकी मुलाकात मारियान से होती है |

‘मारियान’ समाजशास्त्र की लेक्चरर तो है, साथ ही उसमें लेखन की प्रतिभा भी है | वह मेहनती, संवेदनशील, कर्मठ, प्रतिभाशाली सर्जक तो है, परन्तु प्रपंच बुद्धि नहीं उसकी इसी प्रतिभा का लाभ उठाने हेतु ‘इविंग’ उसे अपने जाल में फँसाकर उससे विवाह करता है | यहाँ तक कि ‘मारियान’ की माँ बनने की इच्छा लेखन के आड़े ना आये, इसलिए उसका गर्भपात तक करवा देता है | वह ‘मारियान को समझाता है कि यह उपन्यास वुमेन ऑफ दी अर्थ उनकी संतान है | वह कहता है-

“गर्भ मैं धारण कर रहा हूँ, बीज तुम डाल रही हो |”

कठगुलाब – मृदुला गर्ग

उसके प्रपंच से अनभिज्ञ मारियान पिघल जाती है और स्वयं को इस कार्य में झोंक देती है | परन्तु ‘इविंग’ इस उपन्यास को सिर्फ अपने नाम पर छपवाता है जिसका ‘मारियान’ प्रतिकार करते हुए उससे अलग होकर उस पर केस करती है और अपने हक की लड़ाई लड़ती है | तलाक के बाद वह गैरी नामक व्यक्ति से विवाह करती है, परन्तु फिर भी उसे सन्तान सुख की प्राप्ति नहीं हो पाती है | अन्ततः वह अपनी प्रतिभा के बल पर सारी विषमताओं से जूझती एक ख्याति प्राप्त उच्चकोटि की उपन्यासकार के रूप में स्वयं को प्रतिस्थापित करती है | उसका उपन्यास, उसकी रचना ही उसका शिशु बनता है |

माँ-बाप के न होने के कारण नर्मदा बहन के घर रहने को बाध्य है जहाँ उसके जीजा गनपत द्वारा उसका निरन्तर शोषण होता है | उसका जीजा नर्मदा से जबरन विवाह भी कर लेता है | ‘नर्मदा’ का व्यक्तित्व धैर्यशील, परिश्रमी तथा जुझारू है | उसकी साहसी वृत्ति तथा समाज से लोहा लेने के जज्बे का बोध उसके इस कथन से होता है-

“एक बालक हो जाता तो आज अपना कहने को कोई होता | दुनिया से ना डरती में इसी कुठरिया में छाती ठोक कर पाल पोस लेती “

कठगुलाब – मृदुला गर्ग

नर्मदा स्वयं पर हो रहे अत्याचार का प्रतिकार करती हुई एक दिन अपने जीजा को फटकार लगाकर घर छोड़कर चली जाती है | उसका यह विद्रोह उसे स्वावलंबन की ओर ले जाता है | नर्मदा अपने विद्रोह को सार्थकता प्रदान करते हुए सिलाई का कार्य प्रारंभ करती है तथा आत्मनिर्भर बनती है | इस उपन्यास में नर्मदा एक गरीब तबके की महिला का प्रतिनिधित्व करती है |

उपर्युक्त पात्रों के विपरीत ‘असीमा’ एक तेजतर्रार युवती है | नारी पर अत्याचार करने वालों पर हाथ तक उठाती है | एक समूचे अभियान की भांति दुखी तथा पीड़ित महिलाओं के लिए कार्य करती है | यहाँ तक कि पुरुषों से दो-दो हाथ करने के लिए कराटे भी सीखती है | अपनी माँ के दुखी जीवन से ‘असीमा के मन में पुरुषों के प्रति घृणा का भाव है तथा वह अपने पिता, भाई और नमिता के पनि को हरामी नं. 1, 2, 3 कहती है | उसे किसी से दबकर रहना या अन्याय सहन करना पसंद नहीं विवाह में उसे विश्वास नहीं है | दिल्ली की ओक्सफोग शाखा में कार्य करते हुए अन्ततः वह ‘गोधड़’ को अपनी कर्मभूमि बनाती है |

उपन्यास में विपिन एक मात्र ऐसा पुरुष पात्र है जो नारी सुलभ संवेदनशीलता से भरा है | विपिन वैवाहिक जीवन से दूर रहता है | इसका कारण उसके माँ का दुःख भरा वैवाहिक जीवन है | पिता के न रहने पर उसकी माँ दिनोरात रोती रहती है | विपिन कई स्त्रियों से शारीरिक सम्बन्ध बनाता है, परन्तु उनसे विवाह नहीं करता | विपिन असीमा के प्रति आकर्षित होता है तथा उससे विवाह करना चाहता है, परन्तु असीमा विवाह नहीं करना चाहती | अन्ततः वह निरजा से बिना विवाह किए सन्तानोत्पत्ति हेतु सम्बन्ध बनाता है, किन्तु निरजा में शारीरिक कमी होने से यह संभव नहीं हो पाता | अन्त में निराश हो वह भी गोधड़ को ही अपनी कर्मभूमि बनाता है | उपन्यास के सभी पात्र किसी न किसी रूप में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं |

कठगुलाब उपन्यास में मृदुला जी ने नारीवादी चेतना को प्रतिस्थापित किया है | उपन्यास की सभी नारी पात्रों में चेतना विद्यमान है | असीमा पुरुषों को हरामी कहती है | उपन्यास में अनेक समस्याओं को उमारा गया है | बाल मजदूरी, स्त्री शिक्षा, अकेलापन तथा पुरुष की कमी को पूरा करने के लिए स्त्री का स्त्री के साथ सम्बन्ध स्थापित करना आदि | नर्मदा बाल मजदूरी का शिकार होती है | अमरीका से वापस आयी स्मिता अकेली है | दो बार शादी करने के बावजूद मारियान भी अकेलेपन का शिकार है | माँ के निधन के उपरांत असीमा भी अकेली रह जाती है | इस प्रकार इस उपन्यास में नारी जाति की अनेकानेक वेदनाओं का चित्रण बड़े ही मार्मिक ढ़ंग से किया गया है |

कठगुलाब उपन्यास के पात्र

कठगुलाब उपन्यास के प्रमुख नारी पात्रों जैसे स्मिता, मारियान, असीमा तथा नर्मदा आदि के अतिरिक्त दर्जिन बीबी, गंगा, नमिता, निरजा, वरजिनिया आदि गोण पात्र है | सभी शोषित पात्र अपने ऊपर हो रहे अन्यायों का प्रतिकार करते दिखाई पड़ते हैं तथा इन पात्रों को अन्ततः अपना प्रतिशोध किसी न किसी रूप में अवश्य प्राप्त होता है | उदाहरणार्थ स्मिता को उसके बलात्कार के प्रतिशोध की प्राप्ति जीजा के मौत की खबर सुनकर होती है तथा उसे मुक्ति मिलती है | अमेरिका में पति जारविस द्वारा बेल्ट से मारे जाने पर स्मिता प्रतिकार करते हुए उसी बेल्ट से जारविस की भी पिटाई करती है | इस पिटाई के कारण उसका गर्भपात हो जाता है और उसे आजीवन सन्तान सुख प्राप्त नहीं हो पाता | तलाक के पश्चात् वह रॉ नामक संस्था में शरण लेती है जहाँ वह पहले काम करती थी | यहाँ वह तीन तरह की स्त्रियों से मिलती है जिसमें प्रथम वे महिलाएँ हैं जो एब्जूड विमेन अर्थात् लाछित, प्रताड़ित और बलात्कृत हैं, दूसरी करुणा एवं संवेदना की मूर्तियों हैं तथा तीसरी वे हैं जिनमें दभ का अतिरेक है | बहन का घर छोड़ ‘रा’ से जुड़ने और अन्त में गोधड़ परियोजना का प्रारंभ कर बा के रूप में एक कार्यकर्ता हो जाना उसकी सफलता ही है |

नमिता ने भी अपने पति से बदला लिया | स्वाभिमानी दर्जिन पति द्वारा किसी और स्त्री के लिए छोड़े जाने पर उससे पैसे लेना बंद कर देती है तथा सिलाई के कारखाने को खड़ा कर आत्मनिर्भर बनती है | मारियान भी शोषित होने के बाद अपने साहस को समेट पुनः लेखन कार्य प्रारंभ करती है और अपना उपन्यास छपवाकर अपनी खोयी प्रसिद्धि प्राप्त तो करती ही है साथ ही अपने उपन्यास की शैली के माध्यम से इविंग के झूठ को लोगों के सामने ले आती है | अन्त में गोधड परियोजना से जुड़कर स्वयं को सेवाकार्य में संलग्न कर विजय हासिल करती है |

इसी क्रम में नर्मदा भी अपने जीजा का घर छोड़, अपने विद्रोह को सार्थकता प्रदान करते हुए सिलाई का कार्य प्रारंभ करती है तथा स्वावलंबी बनती है | असीमा भी दुःखी तथा पीड़ित महिलाओं के लिए कार्य करती हुई अपने जीवन को सेवा कार्य में समर्पित कर गोधड़ में स्कूल चलाती हुई अपने जीवन को सार्थकता प्रदान कर अन्ततः विजय प्राप्त करती हैं | इस प्रकार इस उपन्यास में लगभग सभी पात्र शोषित तथा प्रताड़ित तो हैं, परन्तु चेतनाशून्य नहीं |

उपन्यास के संवाद

कठगुलाब उपन्यास के संवाद पात्रों के विधि आयामों से रूबरू करवाते हैं | नारी पात्रों जैसे स्मिता, नर्मदा, असीमा आदि के संवादों में उनके प्रतिशोधात्मक भाव की प्रबलता साफ दिखाई पड़ती है | जब नर्मदा को ज्ञात होता है कि उसके शोषण में उसकी बहन का भी हाथ है तो वह विद्रोही स्वर अख्तियार करते हुए कहती है-

“वह मेरी बहन ना दुस्मन है, पहले जान लेती तो तुम दोनों की बोटी-बोटी काटके चील कौवों को खिला देती | हिम्मत हो तो आ मेरे सामने |”

कठगुलाब – मृदुला गर्ग

इसी प्रकार असीमा पुरुषों से इतनी नफरत करती है कि उन्हें गाली देते हुए हरामी तक कहती है | वह कहती है-

“उन दोनों के लिए, हमेशा इसी लफ्ज का इस्तेमाल करूँगी हरामी नंबर एक, मेरा बाप हरामी नंबर दो मेरा भाई माँ चाहे तो पूजा करे उनकी में किसी साले गर्द से वास्त नहीं रखना चाहती |”

कठगुलाब – मृदुला गर्ग

इस उपन्यास के माध्यम से भारतीय पुरुष प्रधान समाज में आज भी भौतिकवादी प्रवृत्ति तथा स्त्री पुरुष में किए जाने वाले भेद को उकेरा गया है | मिरजा का पिता अपनी लायक तथा संस्कारी पुत्री के बदले कभी टेढ़ी आँखों भी न सुहाने वाले पुत्र को अपनी सारी जायजाद दे देते हैं | वे अपनी पुत्री को प्रेम तो अवश्य करते हैं, परन्तु अन्तत जायजाद तो पुत्र को ही देते हैं | नारी जाति को पुरुषों द्वारा बहकाये जाने वाली प्रवृत्ति का पता निरजा के इन शब्दों से चलता है-

“नालायक-से-गालायक बेटे को जायदाद देने की लालच में तरह-तरह के प्रपंच करके बेटी को बेदखल किया जाता है |

कठगुलाब – मृदुला गर्ग

कठगुलाब उपन्यास का परिवेश, भाषा एवं शैली

इस उपन्यास में भारत तथा अमरीका दोनों के समाज एवं उसमें स्त्रियों की स्थिति आदि को उजागर किया गया है | उपन्यास की भाषा पात्रानुकूल तथा उनके मानसिक स्थिति एवं परिवेश को जीवंत बनाती है | नर्मदा की भाषा अशिक्षित एवं गवार की भाषा के रूप में प्रकट है | कठगुलाब उपन्यास में हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी शब्द जैसे- डियोशन, पेशनेट, पोपर, उर्दू शब्द जैसे- मर्दमार, शगुफा आदि तथा देशी भाषाओं की भरमार तो है ही साथ ही अनेक कहावतों एवं मुहावरों का प्रयोग भी दृष्टव्य है | जैसे- “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे इस प्रकार कठगुलाब’ उपन्यास मृदुला जी का अबतक लिखे गए उपन्यासों में सबसे सशक्त उपन्यास है जो लेखिका की अपनी बौद्धिकता तथा परिपक्वता का परिचायक है | पाँच खण्डों में विभक्त इस उपन्यास में पुरुषों द्वारा नारी पर हो रहे आर्थिक, शारीरिक, बौद्धिक शोषण तथा इसके प्रतिकार हेतु किस प्रकार नारी आत्मनिर्भरता के लिए प्रयत्न कर स्वयं को पुरुष के समकक्ष होने के लिए संघर्ष करती है, यही इस उपन्यास का कथानक है |


Dr. Anu Pandey

Assistant Professor (Hindi) Phd (Hindi), GSET, MEd., MPhil. 4 Books as Author, 1 as Editor, More than 30 Research papers published.

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