मेरा प्रेम ….. अमावश की कालिमा के पीछे है छुपा
मेरा प्रेम …..अमावश की कालिमा के पीछे है छुपा ,होगा नहीं उदित सूर्य प्रकाश पुंज के साथ ,और होगा नहीं उजाला नया |इस कालिमा के मध्य ग्रशेगा मुझे राहु,बच ना सकूँगा शायद उसके प्रकोप से |उठेगी अर्थी मेरी बेरुखी और गम की टिकठी पर,चिता सजेगी , बेवफाई की लकड़ी होगी, और आग मेरे दिल की…
