कुछ कहना था उनसे, पर लफ्जों ने सहारा ना दिया

कुछ कहना था उनसे ,पर लफ्जों ने सहारा ना दियागमे भवर में थे जब , कस्ती ने किनारा ना दियाकुछ गर्दिसें यूँ थी जो गर बाँटते उनसे ,उनकी आंशुओं के…

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विस्थापन का खट्टा-मीठा पारितोष – ‘वाकिंग पार्टनर’ | Walking Partner Kahani Sangrah by Usha Raje Saxena

विस्थापन की वृत्ति प्रकृति प्रदत्त हर जीवों में देखी जा सकती है | फिर चाहे इसका मूल कारण आस-पास के भौगोलिक परिवेश में बदलाव हो, अथवा जीविका की जद्दोजहद |…

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