आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें

आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें

आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें …….
कहाँ जा तुम जा छिपी हो ,
लगता है जैसे दिल की बस हर इक कली मुरझा चुकी हो |
आंख में आंसू हैं दिल में ठंडी आहें ,
आज याद आती हैं तेरी वो हशी चंचल अदाएं |
आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें …….

झुकी पलकों को तेरी देख उठता यूँ लगे सूरज उदय हो ,
मुश्कुराए तू जो लगता हो रहा प्रातः प्रहर हो |
खुले ये केश तेरे जब लचकती लंक तक हो लें ,
लगे नभ में घने बादल कई अठखेलियाँ खेलें |
रति सम चाल जिसके पग तले,
पलके बिछाती थी ये राहें |
आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें …….

आज भी गलियां वही हैं ,
बागों में भी अधखिली कलियाँ वही हैं |
आज भी बागों में है भौरों का गुंजन ,
महक वैसी आज भी जैसे हवा में घुला चन्दन |
आज भी तो तड़पती हैं ,
जा मेरी अधखुली बाहें |
आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें …….


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