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“साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, दिशा भी है।”

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  • थर्ड जेंडर : हिंदी कहानियां,किन्नर विमर्श
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    थर्ड जेंडर : हिंदी कहानियां, किन्नर जीवन का संघर्ष | Third Gender : Hindi kahaniyan – Kinnar jeevan ka Sangharsh

    ByDr. Anu Pandey February 25, 2021April 8, 2021

    हिंदी साहित्य में दलित विमर्श, स्त्री विमर्श , आदिवासी विमर्शों की ही भांति किन्नर विमर्श आज किन्नरों के जीवन की हकीकतों को परत-दर परत खोलता चला जा रहा है | जहाँ हमारा संपूर्ण समाज स्त्री एवं पुरुष इन्हीं दो वर्गों को समाज की धुरी मान बैठा, है वहीं इन दोनों से पृथक  एक ऐसा वर्ग भी…

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  • सत्य व्यास नई वाली हिंदी का रचनाकार
    Author Biographies

    सत्य व्यास (Satya Vyas) : नई वाली हिंदी का रचनाकार

    ByDr. Anu Pandey February 24, 2021May 26, 2021

    सत्य व्यास आधुनिक हिंदी के पेशेवर-शौकिया लेखक हैं | वह बीएचयू के प्रतिष्ठित लॉ स्कूल से लॉ ग्रेजुएट हैं और लॉजिस्टिक प्रोफेशनल हैं । उनके उपन्यासों की भाषा को “नई वाली हिंदी” के नाम से भी जाना जाता है। सत्य व्यास ने नए युग के हिंदी लेखन में खुद के लिए एक सशक्त जगह बनाकर…

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  • दलित वर्ग के आत्म संघर्ष की कथा : टूटता वहम | Tootata Vaham By : Shushila Takbhore
    Hindi Articles

    दलित वर्ग के आत्म संघर्ष की कथा : टूटता वहम | Tootata Vaham By : Shushila Takbhore

    ByDr. Anu Pandey February 21, 2021April 8, 2021

    हमारा भारतीय समाज सदियों से ही अपनी अनेक सामाजिक विसंगतियों का दंश झेलता चला आ रहा है | फिर चाहे स्त्री की स्थिति हो या जाति व धर्म आधारित वर्ग भेद | इस वर्ग भेद या छुआछूत आदि के परिणाम स्वरूप हमारे अपने लोग अपनी सामाजिक एवं धार्मिक व्यवस्था से नित पलायन करते जा रहे हैं | हालाँकि आज स्थिति में…

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  • देह की कीमत- तेजेंद्र शर्मा
    Hindi Articles

    स्त्री जीवन की विडम्बनाएं : देह की कीमत | ‘Deh ki Keemat’ kahani sangrah by : Tejendra Sharma

    ByDr. Anu Pandey February 18, 2021April 8, 2021

    तेजेंद्र शर्मा का नाम हिंदी के प्रवासी भारतीय साहित्यकारों में विशेष उल्लेखनीय है | २१ अक्टूबर १९५२ में पंजाब के जगरांव में जन्मे तेजेंद्र जी ने अपनी कविताओं, नाटकों और कहानियों के माध्यम से बहुत कम समय में ही हिंदी साहित्य जगत में अपना एक विशेष स्थान बना लिया है | अब तक उनके कुल…

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  • मानवीय संवेदनाओं का कोलाज : ‘प्रवास में’ | ‘Pravas Mein’ Kahani Sangrah By Usha Raje Saxena
    Hindi Articles

    मानवीय संवेदनाओं का कोलाज : ‘प्रवास में’ | ‘Pravas Mein’ Kahani Sangrah By Usha Raje Saxena

    ByDr. Anu Pandey February 15, 2021April 8, 2021

    प्रवासी भारतीय साहित्य ने विगत कुछ वर्षों में हिंदी साहित्य संसार को बहुत ही समृद्ध किया है | हिंदी साहित्य में अन्य विमर्शों की भांति प्रवासी साहित्य भी अपनी विशेष पहचान के साथ हिंदी साहित्य में अपनी जड़ें जमता हुआ नजर आ रहा है | हिंदी भाषा में किसी विशेष शक्ति और आकर्षण का ही कमाल है कि आज…

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  • दाम्पत्य जीवन की दर्द भरी कहानियां : ‘दीवार में रास्ता’ | Deewar Mein Raasta Kahani Sangrah By- Tejendra Sharma
    Hindi Articles

    दाम्पत्य जीवन की दर्द भरी कहानियां : ‘दीवार में रास्ता’ | Deewar Mein Raasta Kahani Sangrah By- Tejendra Sharma

    ByDr. Anu Pandey February 15, 2021April 8, 2021

    प्रवासी भारतीय साहित्यकारों में अनेक ऐसे लेखक हैं जिन्होंने हिंदी साहित्य में अपना विशेष योगदान देकर हिंदी साहित्य संसार के भंडार को समृद्ध किया है | उषा राजे सक्सेना, दिव्या माथुर, तेजेंद्र शर्मा आदि इस विधा में लेखनी चलाने वाले कुछ विशिष्ट नाम हैं | २१ अक्टूबर १९५२ में जन्मे तेजेंद्र जी प्रवासी साहित्य संसार…

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  • मेरा प्रेम आमवास की कालिमा के पीछे है छुपा
    Hindi Poems

    मेरा प्रेम ….. अमावश की कालिमा के पीछे है छुपा

    ByAmar Tripathi February 15, 2021June 5, 2021

    मेरा प्रेम …..अमावश की कालिमा के पीछे है छुपा ,होगा नहीं उदित सूर्य प्रकाश पुंज के साथ ,और होगा नहीं उजाला नया |इस कालिमा के मध्य ग्रशेगा मुझे राहु,बच ना सकूँगा शायद उसके प्रकोप से |उठेगी अर्थी मेरी बेरुखी और गम की टिकठी पर,चिता सजेगी , बेवफाई की लकड़ी होगी, और आग मेरे दिल की…

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  • आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें
    Hindi Poems

    आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें

    ByAmar Tripathi February 15, 2021June 5, 2021

    आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें …….कहाँ जा तुम जा छिपी हो ,लगता है जैसे दिल की बस हर इक कली मुरझा चुकी हो |आंख में आंसू हैं दिल में ठंडी आहें ,आज याद आती हैं तेरी वो हशी चंचल अदाएं |आज भी तुझे ढूँढती मेरी निगाहें ……. झुकी पलकों को तेरी देख उठता यूँ…

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  • कुछ कहना था उनसे, पर लफ्जों ने सहारा ना दिया
    Hindi Poems

    कुछ कहना था उनसे, पर लफ्जों ने सहारा ना दिया

    ByAmar Tripathi February 15, 2021June 5, 2021

    कुछ कहना था उनसे ,पर लफ्जों ने सहारा ना दियागमे भवर में थे जब , कस्ती ने किनारा ना दियाकुछ गर्दिसें यूँ थी जो गर बाँटते उनसे ,उनकी आंशुओं के डर ने गवारा ना कियाकुछ कहना था उनसे …. आज भी वो तड़प है , कुछ कह सकूँ शायदआज फिर से प्यार में मैं मर…

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  • विस्थापन का खट्टा-मीठा पारितोष – ‘वाकिंग पार्टनर’ | Walking Partner Kahani Sangrah by Usha Raje Saxena
    Hindi Articles

    विस्थापन का खट्टा-मीठा पारितोष – ‘वाकिंग पार्टनर’ | Walking Partner Kahani Sangrah by Usha Raje Saxena

    ByDr. Anu Pandey February 6, 2021April 6, 2021

    विस्थापन की वृत्ति प्रकृति प्रदत्त हर जीवों में देखी जा सकती है | फिर चाहे इसका मूल कारण आस-पास के भौगोलिक परिवेश में बदलाव हो, अथवा जीविका की जद्दोजहद | इतिहास में जहाँ इस वृत्ति के साक्ष्य भलीभांति परिलक्षित होते हैं वहीँ दूसरी ओर विज्ञानं इससे सम्बंधित तर्कों की वैज्ञानिक दृष्टि से पुष्टि भी करता…

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