मेरा प्रेम ….. अमावश की कालिमा के पीछे है छुपा

मेरा प्रेम ….. अमावश की कालिमा के पीछे है छुपा

मेरा प्रेम …..
अमावश की कालिमा के पीछे है छुपा ,
होगा नहीं उदित सूर्य प्रकाश पुंज के साथ ,
और होगा नहीं उजाला नया |
इस कालिमा के मध्य ग्रशेगा मुझे राहु,
बच ना सकूँगा शायद उसके प्रकोप से |
उठेगी अर्थी मेरी बेरुखी और गम की टिकठी पर,
चिता सजेगी , बेवफाई की लकड़ी होगी, और आग मेरे दिल की |

जनाजे के साथ एक और रुदन होगा , मेरा !
मेरी मौत का नहीं , अफ़सोस का |
फीके पड़ेंगे सबके रुदन ,
मेरी आत्मा के रुदन के सामने |
उस रुदन में भी प्रिये ,
सिर्फ नाम तुम्हारा होगा |


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