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“साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, दिशा भी है।”

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    मानवीय संवेदनाओं का कोलाज : ‘प्रवास में’ | ‘Pravas Mein’ Kahani Sangrah By Usha Raje Saxena

    ByDr. Anu Pandey February 15, 2021April 8, 2021

    प्रवासी भारतीय साहित्य ने विगत कुछ वर्षों में हिंदी साहित्य संसार को बहुत ही समृद्ध किया है | हिंदी साहित्य में अन्य विमर्शों की भांति प्रवासी साहित्य भी अपनी विशेष पहचान के साथ हिंदी साहित्य में अपनी जड़ें जमता हुआ नजर आ रहा है | हिंदी भाषा में किसी विशेष शक्ति और आकर्षण का ही कमाल है कि आज…

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